जालंधर 29 अक्तूबर -:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान नितिश भारद्वाज से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन,षोडशोपचार पूजन,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और आहुतियों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर धाम के संस्थापक एवं व्यवस्थापक नवजीत भारद्वाज ने संत बुल्लेशाह जी की वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को सत्य, सद्भाव, विनम्रता और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए सूफी संत बुल्लेशाह जी की प्रसिद्ध पंक्तियों
‘‘मुँह आई बात न रैहंदी ए । झूठ आखां ते कुझ बचदा ए, सच आखयां भांबड़ मचदा ए । जी दोहां गल्लां तों जचदा ए, जच जच के जिहबा कैह्न्दी ए । इक लाज़म बात अदब दी ए, सानूँ बात मलूमी सभ दी ए । हर हर विच सूरत रब्ब दी ए, किते ज़ाहर किते छुपेंदी ए ।
का भावार्थ समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि सूफी संत बाबा बुल्लेशाह जी का यह कथन केवल एक साधारण वाक्य नहीं, बल्कि उस आंतरिक सत्य की अभिव्यक्ति है जो हृदय में उमड़ते ही होठों पर आ जाता है। जब परमात्मा का प्रेम और सत्य भीतर तक भर जाता है, तो वह किसी पहरे या छुपेपन का मोहताज नहीं रहता। वह बाहर आकर ही रहता है।
संतों-महापुरुषों का जीवन इस बात का साक्षी है कि वे भीतर और बाहर से एक होते हैं। उनके मन में जो होता है, वही उनकी जुबान पर होता है। झूठ आखां ते कुझ बचदा ए, सच आखयां भांबड़ मचदा ए। का भावार्थ समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि यदि संसार की रीति के अनुसार झूठ बोला जाए, पाखंड किया जाए तो लोक-लाज बच जाती है, दुनिया खुश रहती है, और रिश्ते-नाते सुरक्षित रहते हैं। लेकिन यदि निखालिस सत्य बोल दिया जाए तो अहंकार को ठेस पहुँचती फिर समाज में भांबड़ मच जाता है और विवाद खड़े हो जाते हैं। परंतु एक सच्चा साधक लोक-लाज की परवाह किए बिना सत्य के मार्ग पर अडिग रहता है। जी दोहां गल्लां तों जचदा ए, जच-जच के जिहबा कैहन्दी ए । का भावार्थ समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि मन सोचता है कि क्या बोलें और क्या न बोलें। यह स्थिति एक अजीब असमंजस की है- एक तरफ संसार का डर है, तो दूसरी तरफ भीतर का प्रेम और सत्य है। परंतु जब मनुष्य का हृदय पूरी तरह जागृत हो जाता है, तब उसकी जिह्वा (जुबान) बहुत तौल कर, सोच-समझकर और प्रेम से उस मालिक का पैगाम दुनिया तक पहुँचाती है। वह जो भी कहती है, वह नपे-तुले ज्ञान और दिव्यता से ओत-प्रोत होता है। इक लाज़म बात अदब दी ए, सानूँ बात मलूमी सभ दी ए । का भावार्थ समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने माँ भक्तों कहा कि सत्य बोलते समय या ज्ञान की बात करते समय सबसे पहली शर्त अदब (विनम्रता और आदर) की है। अहंकार में बोला गया सत्य भी कड़वा जहर बन जाता है। बुल्लेशाह जी कहते हैं कि हमें इस सृष्टि के एक-एक ज़र्रे की हकीकत मालूम हो चुकी है।
नवजीत भारद्वाज जी ने माँ भक्तों को समझाते हुए कहा कि वह हकीकत क्या है? अगली पंक्ति में वे इसका सार खोल देते हैं। हर हर विच सूरत रब्ब दी ए, किते ज़ाहर किते छुपेंदी ए । इस संसार का कण-कण उसी एक मालिक की अभिव्यक्ति है। कोई जर्रा ऐसा नहीं जहाँ वह न हो। फर्क सिर्फ इतना है कि कहीं उसका रूप बिल्कुल प्रकट है और कहीं वह छिपा हुआ है। जैसे सूरज की रोशनी हर जगह है, पर बादलों के पीछे छिप जाती है, वैसे ही वह ईश्वर हर मनुष्य, हर जीव और हर प्रकृति के रूप में मौजूद है बस उसे देखने वाली दिव्य दृष्टि की आवश्यकता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचन के समापन पर कहा कि संत बुल्लेशाह जी की वाणी आज भी मनुष्य को आत्मचिंतन, प्रेम और परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा की प्रेरणा देती है।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,राकेश प्रभाकर, समीर कपूर,रोहित भाटिया,जानू थापर, ऋषभ कालिया,नरेंद्र,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ , शंकर , संदीप, रिंकू, प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण ,राजू,संजीव शर्मा,मुकेश,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह,वरुण,नितिश,रोमी,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल,अश्विनी शर्मा ,रविभल्ला, जगदीश, निर्मल,अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।