जालंधर 29 अगस्त -:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनि देव महाराज जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज जी ने नेपाल में आई त्रासदी पर मार्मिक प्रवचन देते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाएं हमें जीवन की नश्वरता और परमात्मा की शक्ति का एहसास करवाती हैं। नेपाल में चारों तरफ तबाही, बिछडऩे का दर्द और अपनों को खोने की पीड़ा जीवन के उस सत्य को सामने रखती है जिसे इंसान अक्सर सुख-सुविधाओं की दौड़ में भूल जाता है। आज जब हम नेपाल में आई इस त्रासदी की तस्वीरें और खबरें देखते हैं, तो दिल भीतर तक कांप उठता है। ऐसे समय में हमें यह समझना चाहिए कि जीवन पर हमारा अधिकार नहीं, परमात्मा की दी हुई अमानत है। उन्होंने संत कबीर जी के अमर दोहे,
‘‘माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोहे। एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोहे॥’’
के माध्यम से समझाया कि माटी कुम्हार से कहती है आज तू मुझे अपने पैरों से रौंद रहा है, मुझे अपने हाथों से आकार दे रहा है, लेकिन याद रखना, एक दिन ऐसा आएगा जब यही मिट्टी तुम्हें अपने भीतर समा लेगी।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि आज इंसान मिट्टी पर खड़ा होकर मिट्टी को ही भूल गया। हम अक्सर अपने जीवन में धन, पद, प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाओं को सबसे बड़ा समझ लेते हैं। लेकिन ऐसी प्राकृतिक आपदाएं हमें याद दिलाती हैं कि इंसान कितना भी सामथ्र्यवान क्यों न हो, जीवन वास्तव में परमात्मा की अमानत है।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को समझाया है, जिस सांस को हम अपना अधिकार समझते हैं, वह भी परमात्मा की दी हुई है। आज नेपाल के पीडि़त परिवारों के लिए हमारी आंखों में संवेदना हो, हमारे दिल में दया हो और हमारी जुबान पर उनके लिए प्रार्थना हो। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उन्हें यह दुख सहने की शक्ति देना। जो लोग संकट में हैं, उनकी रक्षा करना। घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य देना और राहत कार्यों में जुटे हर व्यक्ति को हिम्मत देना।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रवचन के अंत में भावुकता भरे शब्दों में कहा कि प्रभु हमें इतनी संवेदना देना कि किसी दूसरे के दुख को देखकर हमारा दिल भी दुखने लगे। क्योंकि धर्म केवल मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे में माथा टेकने का नाम नहीं। धर्म तो उस समय शुरू होता है, जब किसी रोते हुए इंसान के आंसू पोंछने के लिए हमारा हाथ आगे बढ़ता है।
आज नेपाल की त्रासदी हमें एक ही संदेश दे रही है जिंदगी बहुत अनमोल है, रिश्ते बहुत अनमोल हैं और इंसानियत सबसे बड़ी दौलत है। आइए, हम सब मिलकर नेपाल के पीड़ितों के लिए प्रार्थना करें।
इस अवसर पर विक्की अग्रवाल,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह, नवीन , प्रदीप, सुधीर, परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि ,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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