मधुर वाणी से जीते जा सकते हैं दिल, मीठे बोल ही जीवन का सबसे प्रभावशाली मंत्र : नवजीत भारद्वाज

जालंधर -:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनि देव महाराज जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।


सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान मन्नू से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में आयोजित दिव्य हवन-यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों की गूंज, यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पवित्र अग्नि और श्रद्धापूर्वक अर्पित की गई आहुतियों से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्तिभाव से सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर धाम के संस्थापक एवं व्यवस्थापक नवजीत भारद्वाज जी ने संत गोस्वामी तुलसीदास जी के अमूल्य विचारों का उल्लेख करते हुए मधुर वाणी के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने संत तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे ‘‘तुलसी मीठे बचन तें, सुख उपजै चहुं ओर। *बसीकरन इक मंत्र है, परिहरू बचन कठोर॥’’


की व्याख्या करते हुए कहा कि मधुर वाणी मनुष्य के व्यक्तित्व का सबसे सुंदर आभूषण है। जिंदगी की भागदौड़ और रिश्तों की उलझनों के बीच हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि दुनिया को जीतने के लिए किसी अस्त्र-शस्त्र या बड़े मंत्र की आवश्यकता नहीं होती। संत तुलसीदास जी महाराज ने इस दोहे में जीवन का एक ऐसा अचूक सूत्र दिया है, जो हर ताले को खोल सकता है और वह है ‘‘मीठी वाणी’’।
नवजीत भारद्वाज जी ने प्रभु भक्तों को दोहे की गहराई समझाते हुए कहा कि जब हमारे शब्दों में प्रेम, अपनापन और मिठास घुल जाती है, तो उसका प्रभाव केवल सुनने वाले पर नहीं, बल्कि हमारे अपने मन पर भी पड़ता है। मीठे बोल चारों और सकारात्मकता की ऐसी खुशबू फैलाते हैं जहाँ कलह और तनाव के लिए कोई स्थान नहीं बचता। यह एक ऐसा संगीत है जिसे हर दिल सुनना पसंद करता है।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में लोग दूसरों को अपने वश में करने या अपनी बात मनवाने के लिए न जाने कितने उपाय करते हैं। परंतु तुलसीदास जी स्पष्ट कहते हैं कि सबसे शक्तिशाली वशीकरण मंत्र प्रेम और मधुरता से भरी जुबान है। कड़वी बात से तो अपने भी पराए हो जाते हैं, लेकिन मीठे बोल से तो विरोधी भी अपने हृदय का द्वार खोल देते हैं।
प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने प्रभु भक्तों को बड़ी विनम्रतापूर्वक संदेश देते हुए कहा कि कड़वे वचन और अहंकार से भरे शब्द मान-सम्मान और रिश्तों की नींव को दीमक की तरह चाट जाते हैं। इतिहास गवाह है कि कई बड़े विवाद केवल तीखी जुबान और व्यंग्य-बाणों के कारण ही उपजते हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि हम वाणी के इस जहर का पूरी तरह त्याग कर दें। ईश्वर ने हमें बोलने की जो शक्ति दी है, वह किसी का दिल दुखाने के लिए नहीं, बल्कि बिखरे हुए दिलों को जोडऩे के लिए है।
इस अवसर पर विक्की अग्रवाल,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर,अमरेंद्र कुमार शर्मा, रोहित भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर, ऋषभ कालिया,अजीत कुमार , नरेंद्र,सुमीत,मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा, किशोर,लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा,जगदीश, निर्मल,अनिल,सागर सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हैवानिया के उपरांत लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।